Friday, June 18, 2010

MPVHA Activities on world No Tobacco Day 31 May 2010


This years theme of World No Tobacco Day was " Women and Tobacco with emphasis on marketing to women"

Following activities were organized by MPVHA:

Symposium on Women and Tobacco and celebrity Endorsement with Deepak Raja 30 May 2010.
A symposium was organized by Madhya Pradesh Voluntary Health Association on World No Tobacco Day Theme “Gender and Tobacco”. During the symposium famous comedy champion Mr Deepak Raja was also present he presented a show on Tobacco.
More than 200 participants from various oraganizarions ,NGO, Women Organization, Community policing members, Rotary club etc were present in the programme.
During the symposium women members from political party, rotary club, Social workers were present.

Publication of Poster in Naidunia Newspaper
A poster designed by MPVHA was published in leading newspaper Naidunia on 31 may 2010.

Rallys
Rallys were organized in association with Indore Police and Nagar Suraksha Samiti Members.Senioor suprentindent of police D Shrinivas Rao and SP Makrand Deoskar were present in the rally.

Rally at Umrikheda Village
Rally with CSP Kotwali
Rally with CSP Pardeshipura
CSP Vijay Nagar
CSP Sanyogitaganj
CSP Annapurna , Thana Chandan Nagar

Other Awareness activities
MPVHA in Collaboration with Madhya Pradesh Jan Abhiyaan Parishad of MP government has distributed handouts in 40 villages of Indore block

More than 5000 handouts and 100 posters and slogans were provided to the rally organizers.

Sensitization of governments officers of Burhanpur District 31 May 2010
A meeting was organized at Collect orate office and 50 Government officers from different departments in presence of collector were sensitized.
During the meeting collector has issued orders to CMHO for challan printing. Orders were also issued to Education officer for compliance of section 6 of COTPA. During the Meeting SP and Add SP were also present.
Persons from following department were present.

Collectorate
Women and Child Development
PHE
Education
Health
Panchayat and Samajik Nyay
Tehsildar
Police etc

General awareness Programme at Kamal Talkies Burhanpur 31 May 2010

A general awareness programme cum exhibition was organized at Burhanpur in association with District Administration. During the programmes Collector Mrs Renu Pant ,Add Collector , SP ,SDM , and other key government officials were present.

Monday, May 17, 2010

31 May २०१० विश्व तम्बाकू निषेध दिवस


महिलाओ को तम्बाकू आपदा से बचाने के लिए मनाया जायेगा वर्ष २०१० का विश्व तम्बाकू निषेध दिवस

विश्व स्वास्थय संगठन द्वारा वर्ष २०१० का विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का विषय महिलाओ को ध्यान में रखते हुए घोषित किया गया है ।इस बार का विषय है लिंग और तम्बाकू जिसमे विशेष महत्व महिलाओ को तम्बाकू उत्पादों की मार्केटिंग है । उल्लेखनीय है की विश्व के १०० करोड़ धूम्रपान करने वालो में २० प्रतिशत महिलाए है, यही कारण है की विश्व की तम्बाकू कंपनिया तम्बाकू उत्पाद की खपत महिलाओ में बढ़ाने के लिए नई मार्केटिंग योजनाओ पर काम कर रही है ।सन २०१० के विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का मुख्य उद्देश्य महिलाओ खासकर लडकियो को तम्बाकू उत्पादों की मार्केटिंग से होने वाले दुष्प्रभावो से बचाना है ।गौरतलब है की विश्व के करीब १७० देशो ने व्यापक तम्बाकू नियंत्रण संधि पर हस्ताक्षर किये है । इस बार का तम्बाकू निषेध दिवस इन देशो को तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन और उनके प्रचार प्रसार एवं स्पानसरशिप पर रोक लगाने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।

पूरे विश्व में और भारत में सबसे चिंताजनक बात यह है की महिलाओ खासतौर से लडकियों में तम्बाकू उपयोग का चलन बढ़ता जा रहा है विश्व स्वास्थय संगठन की रिपोर्ट के अनुसार तम्बाकू कंपनिया महिलाओ को तम्बाकू की और आकर्षित करने के लिए प्रयासरत है । विश्व के १५१ देशो से प्राप्त जानकारी के अनुसार १२ प्रतिशत लडको के मुकाबले ७ प्रतिशत लड़किया धूम्रपान करती है , कई देशो में तो लड़के और लड़किया सामान रूप से धूम्रपान करते हे ।वर्ष २०१० का तम्बाकू निषेध दिवस महिलाओ को तम्बाकू महामारी से बचाने के लिए पुरे विश्व में जागरूकता फेलाने का काम करेगा ।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार महिलाओ का स्वास्थ्य हमारे विकास और जन स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है महिलाओ का अच्छा स्वास्थ्य न सिर्फ हम लोगो के लिए जरुरी है बल्कि हमारी आने वाली पीढियों लिए भी यह बहुत जरुरी है ।

हालाँकि इस वर्ष तम्बाकू निषेध दिवस महिलाओ को ध्यान में रखकर मनाया जायेगा लेकिन साथ ही इस बात पर भी ध्यान दिया जायेगा की पुरुषो को भी तम्बाकू आपदा से कैसे बचाया जाये।
विश्व स्वस्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है की तम्बाकू आपदा को नियंत्रित करने के लिए लिंग आधारित नीतिया बनाना बहुत जरुरी है और महिलाओ और पुरुषो दोनों को तम्बाकू से होने वाली जानकारी होना जरुरी है । क्योकि आजकल तम्बाकू कंपनिया लिंग आधारित तम्बाकू उत्पाद बनाने पर जोर दे रही है (यानि महिलाओ और पुरुषो के लिए अलग अलग तम्बाकू उत्पाद), यही कारण है की आज सभी देशो को लिंग आधारित तम्बाकू नियंत्रण नीतिया बनाने की जरुरत है और उसमे महिलाओ की सहभागिता बहुत जरुरी है ।

महिलाओ का स्वास्थ्य और तम्बाकू

• मध्य प्रदेश में (१५-४९) आयु वर्ग के ६८.५ प्रतिशत पुरुष एवं १६ प्रतिशत महिलाए किसी न किसी रूप में तम्बाकू का सेवन करते है ।
• मध्य प्रदेश में ४०.२ प्रतिशत पुरुष एवं ०.५ प्रतिशत महिलाए सिगरेट/बीडी का सेवन करते है ।
• भारत में १.४ प्रतिशत महिलाए धूम्रपान एवं ८.४ प्रतिशत महिलाये खाने योग्य तम्बाकू का सेवन करती है ।
• तम्बाकू सेवन करने वाली महिलाओ में गर्भपात की दर सामान्य महिलाओ से तक़रीबन ९५ प्रतिशत अधिक होती है ।
• तम्बाकू सेवन के कारण महिलाओ में फेफड़ो का कैंसर ,दिल का दौरा, सांस की बीमारी ,प्रजनन सम्बन्धी विकार ,निमोनिया ,माहवारी से जुडी समस्याए अधिक उग्र हो जाती है ।
• तम्बाकू सेवन करने वाली महिलाओ में प्रसव समय से काफी पहले हो जाता है उनके बच्चे सामान्य औसत वजन से करीब ४०० -५०० ग्राम से कम के पैदा होते है ।

महिलाए और तम्बाकू कंपनियों की मार्केटिंग
जिस तरह से महिलाए आत्मनिर्भर हो रही है ऐसे में संभव है की महिलाओ में तम्बाकू प्रयोग का चलन भी बढ़ जाये । विकसित देशो में तो महिलाए धूम्रपान करती है लेकिन अभी भी विकासशील देशो में महिलाए बहुत कम संख्या में धूम्रपान करती है और यही कारण है की तम्बाकू कपनियो को विकाशील देशो में बहुत बड़ा बाज़ार नज़र आ रहा है ।
महिलाओ को सिगरेट की मार्केटिंग का इतिहास
• सन १९१९ में लारिवार्ड कंपनी पहली बार महिलाओ के चित्रों का उपयोग तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन के लिए प्रयोग किया ।
• १९२० में सिगरेट को महिलाओ की स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया ।
• १९२७ में मार्लबोरो ब्रांड में सिगरेट को फेशन और दुबलेपन से जोड़ा गया साथ ही कई कपनियो ने अभिनेत्रियों को तम्बाकू उत्पादों से जोड़ना शुरू किया ।
• १९६० में फिलिप मौरिस कंपनी ने वर्जिनिया स्लिम्स नाम से मार्केटिंग केम्पेन शुरू की जिसकी पंच लाइन थी You have come a long way baby जिसमे बताया गया था की महिलाए अब पुरुषो से पीछे नहीं है ।
महिलाओ को तम्बाकू उत्पादों की मार्केटिंग के लिए कंपनिया कई तरह से उन्हें आकर्षित करती है जैसे तम्बाकू उत्पादों के फ्री सेम्पल देना , स्पोंसरशिप , महिलाओ के लिए खास तरह के ब्रांड बनाना जैसे हलकी मध्यम सिगरेट आदि ।ज्यादातर तम्बाकू कपनिया महिलाओ को सिगरेट की तरफ आकर्षित करने के लिए उसे ग्लेमर ,स्टाइल,सेक्स अपील आदि से जोडती है । इसके अलावा तम्बाकू उत्पादों को महिलाओ के बीच में प्रचारित करने के लिए फ्री सेम्पल, कूपन, पैक डिस्काउंट आदि का प्रयोग करती है । विदेशो में तो कला/ महिला क्लबो की स्पोंसेरशिप तम्बाकू कंपनियों द्वारा करा जाना बहुत आम है । इसके अलावा इन्टरनेट पर भी सिगरेट कंपनियों प्रचार करने में लगी हुई है ।महिलाओ को सिगरेट की तरफ आकर्षित करने के लिए फिल्मो में अभिनेत्रियों को सिगरेट पीते हुए दिखाना बहुत आम हो गया है । हाल ही में कई फिल्मे ऐसी आई जिसमे महिलाओ को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया ।
जहा तक विकासशील देशो की बात है तो अभी भी इन देशो में महिलाओ द्वारा धूम्रपान करना अच्छा नहीं माना जाता है, इसलिए इन देशो में धूम्रपान करने वाली महिलाओ का प्रतिशत बहुत कम है और यही कारण है की विश्व की बड़ी तम्बाकू कंपनिया भारत और चीन जैसे देशो में महिलाओ को तम्बाकू की तरफ आकर्षित करने में लगी हुई है ।भारत में ग्रामीण स्तर पर महिलाओ द्वारा खाने वाले तम्बाकू का प्रचलन ज्यादा और कुछ जगह बीडी का भी प्रयोग महिलाए करती है लेकिन अभी भी ज्यादातर महिलाए तम्बाकू से दूर ही रहती है ,लेकिन आज की महानगरीय जीवन शैली में भारत के ज्यादातर महानगरो में हुक्का सेंटर्स बढ़ते जा रहे हे जहा पर लडकियों द्वारा हुक्का सेवन आम हो चला है ।
आज जबकि पुरे भारत वर्ष में हर साल करीब ८ लाख मौते तम्बाकू से होने वाली बीमारियों के कारण होती है, जिनमे से ज्यादातर पुरुष होते है, लेकिन यदि हमें हमारी आने वाली पीढियों को तम्बाकू आपदा से बचाना है तो पुरुषो के साथ महिलाओ को भी तम्बाकू से बचाना होगा ।

हालाँकि भारत सरकार ने व्यापक तम्बाकू नियंत्रण कानून बनाया है लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य को देखते हुए हमें लिंग आधारित तम्बाकू नियंत्रण नीतिया बनाना होंगी और इसके लिए इन नीतियों में महिलाओ की तरफ विशेष ध्यान देने की जरुरत है साथ ही महिलाओ को निष्क्रिय धुम्रपान से बचाने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध का कढाई से पालन करवाना होगा और
महिलाओ के लिए काम करने वाली संस्थाओ को भी इस विषय से अवगत करना होगा ।

Tuesday, May 4, 2010

पंचायत परिसर होंगे धूम्रपान मुक्त


इंदौर जिले को धूम्रपान मुक्त बनाने के लिए अब इंदौर जिले की पंचायते भी आगे आ गयी है. हाल ही में संपन्न हुए इंदौर जिले की 29 पंचायतो में सरपंचो ने पंचायत परिसर को धूम्रपान मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इंदौर जिले के करीब 29 सरपंचो ने पंचायत परिसर को धूम्रपान मुक्त बनाने की घोषणा करते हुए कहा की पंचायत परिसर में कोई व्यक्ति धूम्रपान नहीं करेगा,पंचायत परिसर में धूम्रपान को बढ़ावा देने वाली कोई सामग्री उपलब्ध नहीं होगी साथ ही पंचायत परिसर में धूम्रपान निषेध सम्बन्धी बोर्ड लगवाये जायेंगे ।सरपंच इस हेतु पंचायत परिसर में धूम्रपान निषेध सम्बन्धी बोर्ड भी लगवाएंगे ।
मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक श्री मुकेश कुमार सिन्हा का कहना है की गावो में पंचायतो का बहुत ज्यादा महत्व रहता है और ऐसे में यदि पंचायते अपने आपको धूम्रपान मुक्त घोषित करती है तो पुरे गाँव में एक अच्छा सन्देश जायेगा और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी लोग धूम्रपान नहीं करेंगे ।
मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसिशन के प्रोग्राम ऑफिसर बकुल शर्मा ने बताया की सरपंचो के प्रशिक्षण शिविर में तम्बाकू आपदा के खतरों के बारे में बताया गया और साथ ही उन्हें भारतीय तम्बाकू नियंत्रण कानून के बारे में भी बताया गया । सरपंचो को जानकारी देते हुए बताया गया की सरपंच गावो में तम्बाकू आपदा नियंत्रण करने के लिए कैसे कदम उठा सकते सकते है और कैसे वे अन्य ग्रामीणों को तम्बाकू के खतरों से अवगत करा सकते है साथ ही वे स्कूल के प्राचार्यो और तम्बाकू उत्पादों को बेचने वाले दुकानदार को तम्बाकू नियंत्रण कानून को लागु करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते है ।
उल्लेखनीय है की भारत में १५ - ४९ आयु वर्ग के ३५ प्रतिशत ग्रामीण पुरुष सिगरेट बीडी का सेवन करते है इसकी तुलना में २९ प्रतिशत शहरी पुरुष सिगरेट बीडी का सेवन करते है मध्य प्रदेश में १५-४९ आयु वर्ग के ६८.५ प्रतिशत पुरुष एवं १६ प्रतिशत महिलाये किसी न किसी रूप में तम्बाकू का सेवन करते है । भारतीय तम्बाकू नित्यंत्रण कानून के अनुसार सभी सार्वजनिक स्थानों को धूम्रपान मुक्त होना जरुरी है और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूरी तरह से प्रतिबंधित हो चुकाहै.
इंदौर जिल के 29 सरपंचो से जब इस बारे में चर्चा की गयी तो उन्होंने पंचायतो परिसरों को धूम्रपान मुक्त करने की संयुक्त वकालत की । सभी सरपंचो ने एक राय से कहा की तम्बाकू नियंत्रण कानून का पालन पंचायतो में पूर्ण रूप से होगा ।
इन पंचायतो के परिसर होंगे धूम्रपान मुक्त
बरलाई ,रोजड़ी , तिगरिया , रालामंडल,मोरोद ,बुडानिया,छोटा बांगरदा ,लिम्बोदी , नवदा पंथ ,दुधिया ,असरावद खुर्द , सिंहसा , उमरिया , कलारिया , जामनिया खुर्द ,सिंदोरा , निहालपुर मंडी , असरावद खुर्द , केलोद करताल,बड़ी कल्मेर , सुनावदी,बड़ा उमरिया ,देव्गुराडिया , बिलावली ,अहीर खेडी ,उम्रिखेदा , मिर्जापुर ,नेनोद ,सनावादिया ,जम्बूरी हप्सी

Thursday, April 8, 2010

WHO World Tobacco Epidemic Report 2009



According to World Tobacco Epidemic 2009 report released by WHO only 5.4% of the world's population was covered by comprehensive smoke-free laws in 2008, up from 3.1% in 2007.This means that 154 million more people are no longer exposed to the harms of tobacco smoke in work places, restaurants, bars and other indoor public places. Seven countries – Colombia, Djibouti, Guatemala, Mauritius, Panama, Turkey and Zambia – implemented comprehensive smoke-free laws in 2008, bringing the total to 17.
WHO chose to make smoke-free environments the focus of the report because of the harm of second-hand smoke, which causes about 600,000 premature deaths per year, countless crippling and disfiguring illnesses and economic losses in the tens of billions of dollars per year.
The report devotes particular attention to the WHO Framework Convention on Tobacco Control's Article 8, which addresses protection from exposure to tobacco smoke. The Framework Convention, which took effect in 2005, is ratified by nearly 170 countries.
The report also describes countries' efforts to implement the tobacco control package called MPOWER, which WHO introduced in 2008 to help countries implement some of the demand reduction measures in the WHO Framework Convention and its guidelines. These measures are:
1. monitor tobacco use and the policies to prevent it;
2. protect people from tobacco smoke;
3. offer people help to quit tobacco use;
4. warn about the dangers of tobacco;
5. enforce bans on tobacco advertising, promotion and sponsorship; and
6. raise taxes on tobacco.
Less than 10% of the world's population is covered by any one measure, the report states.
The report tracks the global tobacco epidemic, giving governments and other stakeholders a tool to see where evidence-based demand reduction interventions have been implemented and where more progress is needed. It gives country-by-country tobacco use prevalence figures as well as data about cigarette taxation, bans on tobacco advertising, promotion and sponsorship, support for treatment of tobacco dependence, enforcement of tobacco-free laws and monitoring of the epidemic.
Tobacco use continues to be the leading preventable cause of death, killing more than 5 million people per year. Unless urgent action is taken to control the tobacco epidemic, the annual death toll could rise to 8 million by 2030, the report states. More than 80% of those premature deaths would occur in low- and middle-income countries – in other words, precisely where it is hardest to deflect and to bear such tremendous losses.
Other key findings of the report include the following.
• Five more countries –– Djibouti, Egypt, Islamic Republic of Iran, Malaysia and Mauritius –– met the best practices for health warnings on cigarette packages.
• Three more countries –– Israel, Romania and the United Arab Emirates –– offered comprehensive help to quit.
• Only one country –– Panama –– joined the small group of countries that bans all forms of tobacco advertising, promotion and sponsorship. More than 90% of people lack protection from tobacco industry marketing.
• Six more countries –– Czech Republic, Estonia, Fiji, Finland, the Netherlands and Seychelles –– levied tobacco taxes higher than 75% of retail price.
• Of the world's 100 most populous cities, 22 are smoke-free.

In Madhya Pradesh Smokefree public places movement is gearing up now and all the police stations of Indore district have been declared smokefree. In addition to that Indore Dugdh has also declared itself smokefree. Monitoring team formed by MPVHA is continuously monitoring the public places, meeting the officials and advocating for smokefree public places.

Monday, March 29, 2010

इंदौर में और सख्त हो तम्बाकू नियंत्रण कानून


तम्बाकू नियंत्रण कानून के लागू हो जाने के डेढ़ साल बाद भी इंदौर में ज्यादातर जगहों पर इस कानून के सख्ती से पालन की जरुरत है। तम्बाकू नियंत्रण कानून का सार्वजनिक स्थानों पर कितना पालन हो रहा है यह देखने के लिए मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसिएशन , इंदौर की निगरानी टीम द्वारा एक अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में इंदौर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर जाकर देखा गया की वहाँ पर तम्बाकू नियंत्रण कानून का पालन हो रहा है या नहीं ।

अध्ययन के समन्वयक एम् पी वी एच ए के प्रोग्राम ऑफिसर बकुल शर्मा और तकनीकी सलाहकार डा. शालिनी कपूर ने बताया की इस अध्ययन को करने में मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसिएशन , इंदौर द्वारा बनायीं गई निगरानी टीम का योगदान सराहनीय रहा, टीम में करीब २० लोग शामिल है जिसमे डाक्टर ,समाज सेवक,नगर सुरक्षा समिति सदस्य ,वरिष्ठ नागरिक आदि है। इस टीम द्वारा संस्थानों में जाकर तम्बाकू नियंत्रण कानून की जानकारी दी गई और संस्थान प्रमुख को तम्बाकू नियंत्रण के विभिन्न प्रावधानों के बारे में बताया गया और यह भी बताया गया की वे अपने संस्थान को कैसे धूम्रपान मुक्त कर सकते है । इस टीम को बनाने का मुख्य उद्देश्य इंदौर के सभी सार्वजनिक संस्थानों को धूम्रपान मुक्त बनाकर इंदौर को स्मोकफ्री सिटी बनाना है।
इस अध्ययन में ११२ सार्वजनिक स्थानों में तम्बाकू नियंत्रण कानून 2003 के अनुपालन को देखा गया जिसमे २५ सरकारी कार्यालय , ८ प्राइवेट ऑफिस ,५ बैंक ,१६ हॉस्पिटल ,१६ होटल और ४२ शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुखों से मुलाकात की गई।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
• ११२ में से सिर्फ ४७ सार्वजनिक स्थानों (४२ प्रतिशत) जगहों पर ही धूम्रपान निषेध सम्बन्धी बोर्ड लगे थे ।उनमे भी सिर्फ २२ स्थानों (२० प्रतिशत) पर ही कानून के अनुसार निर्धारित प्रारूप के बोर्ड लगे थे।

• २५ में से सिर्फ १५ सरकारी कार्यालयों में धूम्रपान निषेध सम्बन्धी बोर्ड लगे थे उनमे भी सिर्फ २ जगहों पर कानून द्वारा निर्धारित प्रारूप के बोर्ड लगे थे बाकि जगहों पर सामान्य बोर्ड लगे थे ।इसके अलावा सिर्फ २ जगहों पर धूम्रपान निषेध सम्बन्धी शिकायत अधिकारी का नाम मौजूद था।

• ८ प्राइवेट ऑफिस में से सिर्फ २ में , ५ बैंक में से सिर्फ २ में,१६ होटल में से सिर्फ ११ में ,१६ हॉस्पिटल में से सिर्फ १० में,११ कालेज में से सिर्फ ४ में और ३१ स्कूलों में से सिर्फ ३ में धूम्रपान निषेध सम्बन्धी बोर्ड लगे थे ।

• ११२ में से सिर्फ ८ (७ %) जगहों पर धूम्रपान निषेध सम्बन्धी शिकायत अधिकारी का नाम मौजूद था ।

• ४२ शैक्षणिक संस्थानों में से ९ संस्थानों (२१ %) के ३०० फीट के दायरे में तम्बाकू उत्पाद की दुकान मौजूद थी इसके अलावा ४२ में से सिर्फ ५ संस्थानों ने अपने गेट पर संस्थान के ३०० फीट के दायरे में तम्बाकू बिक्री निषेध सम्बन्धी बोर्ड लगा रखे थे।कानून के अनुसार सभी शैक्षणिक संस्थानों के ३०० फीट के दायरे में तम्बाकू उत्पाद की दूकान प्रतिबंधित है और इसके अनुपालन के लिए शैक्षणिक संस्थानों को अपने गेट पर बोर्ड भी लगाना है जिस पर लिखा हो की “इस संस्था के १०० गज के दायरे में तम्बाकू उत्पाद की दुकान प्रतिबंधित है” ।

• ११२ स्थानों में से सिर्फ १ जगह चालान बुक मौजूद थी।उल्लेखनीय है की सार्वजनिक स्थानों पर यदि कोई धूम्रपान करता हुआ पाया जाता है तो उसे २०० रु तक का अर्थदंड किया जा सकता है । इस के लिए निर्धारित चालान बुक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थय अधिकारी से प्राप्त की जा सकती है ।

मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसिएशन , इंदौर के कार्यकारी निदेशक श्री मुकेश कुमार सिन्हा का कहना है की इस अध्ययन को करवाने का मकसद यही है की इंदौर जिला पूरे प्रदेश में तम्बाकू नियंत्रण कानून के पालन में अग्रणी हो और इंदौर की जनता को धूम्रपान मुक्त वातावरण मिले । गौरतलब है की भारत में चंडीगढ़ और कोट्यम तम्बाकू मुक्त घोषित हो चुके है ऐसे में इंदौर में भी सभी सार्वजनिक संस्थानों में यदि धूम्रपान निषेध कानून का पालन किया जाये तो जल्द ही हम भी इंदौर को तम्बाकू धूम्रमुक्त घोषित कर सकते है । चूँकि राज्य तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ भी इंदौर में ही है इसलिए इंदौर से तम्बाकू नियंत्रण के क्षेत्र में अपेक्षाए ज्यादा है ।

क्या है तम्बाकू नियंत्रण कानून ?
लोगों को तम्बाकू आपदा से बचाने के लिए हमारी संसद ने सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 (COTPA) बनाया था । इस कानून को २ अक्टूबर २००८ से पूरे देश में लागू कर दिया गया ।

तम्बाकू नियंत्रण कानून 2003 के मुख्य प्रावधान :
सेक्शन ४ सभी सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध है ।
सेक्शन ५ तम्बाकू उत्पादों के प्रचार, प्रसार,उनके द्वारा प्रायोजन निषेध है ।
सेक्शन ६ अ १८ वर्ष से कम उम्र के बच्चो को तम्बाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है ।
सेक्शन ६ ब शैक्षणिक संस्थानों के १०० गज की परिधि में तम्बाकू उत्पादों का विक्रय प्रतिबंधित है ।
सेक्शन ७ तम्बाकू उत्पादों पर चित्रमय स्वास्थ्य चेतावनी प्रदर्शित होनी चाहिए।

Wednesday, March 17, 2010

Monday, March 15, 2010

भारत में तम्बाकू उत्पादों पर नई सचित्र स्वास्थ्य चेतावनी लागू


यह मध्य प्रदेश के लिए गौरव की बात है की हाल ही में तम्बाकू उत्पादों पर नई सचित्र स्वास्थ्य चेतावनियों को लागू करवाने में प्रदेश का भी योगदान रहा है । उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने तम्बाकू उत्पादों पर सचित्र स्वास्थ्य चेतावनी की नई अधिसूचना जारी की है । नवीनतम सूचना के अनुसार, गुटखा और सिगरेट के पेकेट पर मुहँ के कैंसर वाला चित्र होगा जो तम्बाकू उत्पादों के घातक परिणामो के बारे में दर्शायेगा । यह चेतावनियाँ
जून से प्रभावी हो जाएँगी ।
इन चेतावनियों को भारत के ८ राज्यों में करवाए गए अध्ययन में लोगो की राय के अनुसार ही रखा गया है । मध्यप्रदेश में मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसिशन , इंदौर और वालंटरी हेल्थ एसोसिअशन ऑफ इंडिया द्वारा किये गए अध्ययन में खरगोन और इंदौर जिले के ग्रामीण अंचलो में इन स्वास्थ्य चेतावनियों के बारे में ग्रामीणों से राय मांगी गयी थी । लोगो को करीब ११ विभिन्न चित्रों वाली चेतावनियाँ बताई गयी जिसमे कैंसर ,ह्रदयघात से पीड़ित व्यक्ति ,साँस की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति , मुहँ के कैंसर का चित्र आदि बताये गए थे ।करीब ३०० ग्रामीणों पर किये गए अध्ययन में उनसे विभिन्न प्रश्न पूछे गए जैसे उन्हें चित्र देखकर क्या अनुभव होता है , चित्रों वाली चेतावनी होनी चाहिए या नहीं,कैसा चित्र होना चाहिए आदि । इन प्रश्नों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि तम्बाकू उत्पादों पर सचित्र स्वास्थ्य चेतावनियाँ बहुत जरुरी है है और यदि चेतावनियों को डरावने रूप में दिखाया जाये तो बच्चे और जो लोग तम्बाकू उत्पादों का प्रयोग करते है वे इसका प्रयोग करने से पहले सचेत हो जायेंगे । मध्य प्रदेश में इस अध्ययन को करने वाले डॉ शालिनी कपूर और बकुल शर्मा का कहना है कि ग्रामीणों को जब चेतावनियों वाले चित्र बताये गए तो उनका कहना था कि चेतावनियों को आकार में बड़ा होना चाहिए और तम्बाकू उत्पादों के दोनों साइड पर इन चित्रों को होना चाहिए।ग्रामीणों का कहना था की गाँव में गुटखा और बीडी का प्रयोग बढ़ता ही जा रहा है खासकर बच्चे जो इसके खतरों को नहीं जानते उन्हें तम्बाकू के दुष्प्रभावो के बारे में बताना बहुत जरुरी है. ।
मध्य प्रदेश वालंटरी हेल्थ एसोसिशन के कार्यकारी निदेशक मुकेश कुमार सिन्हा का कहना है कि भारत सरकार का यह निर्णय बहुत अच्छा है और तम्बाकू उत्पादों पर अब नई और डरावनी स्वास्थ्य चेतावनी आ जाने के बाद बच्चे ,निरक्षर लोग और अन्य तम्बाकू उपयोगकर्ता तम्बाकू के खतरों से बेहतर तरीके से अवगत होंगे ।
उल्लेखनीय है की भारतीय तम्बाकू नियंत्रण कानून के अनुसार सभी तम्बाकू उत्पादों के मुख्य प्रदर्शन भाग के ४० प्रतिशत हिस्से पर चित्रों वाली चेतावनी अनिवार्य है और इन चेतावनियों को हर वर्ष बदला जाना है।